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Wednesday, 28 July 2021

July 28, 2021

शयन नियम और दिशा(Sleeping rules and direction)




शयन नियम और दिशा(Sleeping rules and direction):-प्राचीन काल के जमाने से मनुष्य को सोने के विशेष बातें को अपने ज्ञान-चक्षु से जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे ऋषि-मुनियों ने निद्रा से सम्बंधित बहुत गहरा अध्ययन किया था। उन्होंने मनुष्य को किस तरह अपने शरीर को स्वस्थ रखना चाहिए उससे सम्बन्धित मनुष्य को क्या-क्या बातों का ध्यान रखना चाहिए   मनुष्य के जीवन में भोजन करने के तरीके के समान ही शयन करने के तरीके और दिशा का बहुत ही महत्व है।सही दिशा की ओर नहीं सोने से उस दिशा का असर मनुष्य के स्वास्थ्य,आर्थिक एवं मानसिकता पर पड़ता है।

आयुवेद शास्त्र में ,धार्मिक धर्म ग्रन्थों, वास्तुशास्त्र और आधुनिक विज्ञान शास्त्र आदि में इस बात को सिद्ध किया है

शयन विधान

प्रत्येक मनुष्य को जल्दी प्रातःकाल के ब्रह्म मुहूर्त में उठाना चाहिए, जिससे ईश्वर की अनुकृपा प्राप्त हो सके।

मनुष्य को शाम के समय अपना भोजन ग्रहण करके सूर्य अस्त के एक प्रहर लगभग तीन घण्टे के बाद में ही अपने शयन की तैयारी करनी चाहिए।

सोने के तरीके या मुद्राऐं:-हमारे धार्मिक शास्त्रों में सोने के तरीके बताए गए वे चार तरह के बताए है जो इस तरह है-

उल्टा सोये भोगी।

सीधा सोये योगी।

दांये सोये रोगी।

बांये सोये निरोगी।

1.उल्टा सोना:-जो मनुष्य उल्टे सोते है वे मनुष्य अपने जीवन में भोग-विलास को ग्रहण करने वाले होते हैं।

2.सीधा सोना:-जो मनुष्य सीधा सोते है वे मनुष्य अपने जीवन में ईश्वर भक्ति और अच्छाई के कार्य करते हुए जीवन को व्यतीत करते है और अपने योग बल से सबकी भलाई की सोच रखने वाले होते है।

3.दायां सोना:-जो मनुष्य दायीं तरफ होकर सोते है वे अपने जीवन में अनेक तरह की बीमारियों से ग्रसित होकर जीवन को बिताने वाले होते है और जीवन भर किसी न किसी तरह की बीमारी जैसे पेट सम्बन्धित, गैस, अपच आदि से ग्रसित होकर रोगी बन जाते हैं।

4.बायां सोना:-जो मनुष्य बायीं तरफ होकर सोते है वे अपने जीवन काल में स्वस्थ रहते है उन पर बिना मतलब की किसी भी तरह की बीमारी हावी नहीं होती हैं।

शास्त्रीय विधान

आयुर्वेद शास्त्र:-आयुर्वेद शास्त्र में बताया गया है कि मनुष्य को 'वामकुक्षि' अर्थात बायीं तरफ होकर ही सोने से लाभ की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य निरोग रहता है।

शरीर विज्ञान के अनुसार:-शरीर विज्ञान के मतों के अनुसार जो मनुष्य उल्टे होकर अर्थात पेट के बल सोते है उनकी नेत्र ज्योति कमजोर हो जाती है और दायीं तरफ होकर अपने शरीर का वजन रखने से उनके रीढ़ की हड्डी अर्थात कशेरुकाओं पर जोर पड़ने से वे कमजोर होकर नुकसान होता है।

सोते व उठते समय मन्त्रों के अनुसार:-मनुष्य को सोते समय गायत्री मंत्र या नवकार मंत्र को कितनी संख्या रखनी चाहिए। धर्म शास्त्रों में बताया गया कि हमारे ऋषि-मुनियों ने सोते समय सात तरह के डर को दूर करने के लिए सात मन्त्र को  संख्या  ("सूतां सात") और उठते समय ("उठता आठ") में आठ कर्मों को दूर करने के लिए आठ मन्त्र की संख्या रखनी चाहिए।

सात भय:-धर्म शास्त्रों में सात तरह के भय इहलोक, परलोक, आदान, अकस्मात, वेदना, मरण और अश्लोक भय बताये है इन सभी तरह के भयों से मुक्ति के लिए सात बार गायत्री मंत्र का जप करके ही मनुष्य को अपने शयन के लिए जाना चाहिए।

दिशाओं के आधार पर शयन के बारे में जानकारी:-मनुष्य को दिशाओं के आधार उन दिशाओं के सम्बन्धित नियमों को ध्यान में रखते हुए दिशाओं के अनुसार दोष और फायदा को जानकारी शयन करना चाहिए-

मनुष्य का सिर पूर्व दिशा की ओर रखने के फल:-मनुष्य का सिर पूर्व दिशा की ओर रखकर सोने पर सही व बढ़िया तरीके से निंद्रा आती है। मनुष्य का मस्तिष्क तरोताजा एवं शरीर स्वस्थ रहता है। जो मनुष्य धार्मिक, आस्थावान एवं आध्यात्मिक फायदा की कामना करने वाले मनुष्यों को हमेशा पूर्व दिशा की ओर सिर करके सोना चाहिए। मनुष्य पूर्व दिशा की सिर रखकर सोने पर विद्या में रुचि बढ़ती है और यादास्त शक्ति की प्राप्ति होती है।


मनुष्य का सिर दक्षिण दिशा की ओर रखने के फल:-दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोने से भी मनुष्य को सही तरीके से अच्छी नींद आती है और आवक में बढ़ोतरी होती है। मनुष्य को रुपये-पैसों की प्राप्ति होती है, रोजगार में बरकत होती है और शरीर एकदम स्वस्थ रहता है। .


मनुष्य का सिर पश्चिम दिशा की ओर रखने के फल:-मनुष्य के द्वारा पश्चिम दिशा की ओर सिर करके शयन करने से मनुष्य के जीवन की उम्र में कमी आती हैं, मनुष्य उम्र से पूर्व ही बूढ़ा दिखाई देने लगता है, बाल सफेद होकर गिरने लगते है जिससे मनुष्य को तनाव पैदा होता है। किसी तरह से मन नहीं लगता है, बहुत ही चिंता करने लगता हैं। 


मनुष्य का सिर उत्तर दिशा की ओर रखने के फल:-उत्तर दिशा की ओर सिर करके शयन करने से मनुष्य के जीवन की उम्र कम होने लगती है, वह उम्र से पूर्व ही कमजोर होकर बूढ़ा दिखाई देने लगता है, जिससे शारीरिक कमजोरी होने लगती है उसे मृत्यु के समान कष्ट को भोगना पड़ता हैं। 

◆मनुष्य को अपने घर में शयन कक्ष में सोते समय पूर्व दिशा की ओर सिर करके ही सोना चाहिए।

◆उत्तर दिशा की ओर सिर रखकर सोने से उम्र कम होकर मनुष्य को तनाव बढ़ता है।

◆पश्चिम दिशा की ओर मुख करके सोने से चिंताएं उत्पन्न होती है।

◆मनुष्य को अपने ससुराल में दक्षिण दिशा की ओर मुहं करके शयन करना चाहिए। यदि इस तरह की दिशा नहीं मिलने पर मनुष्य को पूर्व दिशा में सिर करके सो सकते हैं।

◆यात्रा करते समय यात्रा में पश्चिम दिशा की ओर सिर करके शयन करना बढ़िया रहता है। 

◆यात्रा में उत्तर दिशा की ओर मुहं करके सोने से हानि हो सकती है।


शयन करने से पूर्व सावधानियां:-शयन करने से पूर्व शास्त्रों दिशाओं का ध्यान रखने के साथ-साथ अन्य दूसरे बातों का भी ध्यान रखना चाहिए जो कि निम्नलिखित है-

◆मनुष्य को घर में पूर्व-उत्तर या ईशानकोण में उपासना गृह बनाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके उपासना करने से जल्दी ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।

◆मनुष्य को दोपहर के बाद पश्चिम दिशा की ओर मुख करके पेशाब करने से शारीरिक, आर्थिक एवं मानसिक हानि उठानी पड़ सकती है।

◆दिशा ध्यान दक्षिण दिशा को यमदेव और बुरे देवों की दिशा माना गया है इसलिए मनुष्य को कभी दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके नहीं सोना चाहिए क्योंकि यदि ऐसा करेंगे तो यमदेवता व बुरी ताकते अपने ऊपर हावी होगी जिससे हमारे श्रवनेद्रिय तंत्र में हमारे श्रवण तंत्र के माध्यम से बुरे वातावरण और बुरी शक्तियों की वायु प्रवेश करके मस्तिष्क तन्त्र को प्रभावित करेगी जिससे मस्तिष्क तन्त्र में शोणित का संचार सही तरह नहीं होगा और मस्तिष्क तक शोणित उचित मात्रा में नहीं पहुंच पायेगा जिससे मनुष्य को अनेक तरह की व्याधियाँ जैसे यादास्त शक्ति की कमी,अनेक की तरह के भ्रम पैदा होकर भ्रमित करेगे और नेत्र रोग आदि हो सकते है।


◆मनुष्य को मस्तक और पाँव की ओर दीपक को नहीं रखना चाहिए।

मनुष्य को सोते समय यदि शयन कक्ष में दर्पण हो तो उस दर्पण को किसी कपड़े से ढ़ककर रखना चाहिए। बिना ढ़के नहीं सोना चाहिए।

◆यदि शयनकक्ष में ही ईश्वर का पूजा स्थल हो तो उस पूजा स्थल की जगह को ढ़ककर ही सोना चाहिए।

◆दीपक को बायीं तरफ या दायीं तरफ ज्यादा से ज्यादा पांच हाथ दूर होना चाहिए। 

◆शाम के समय में मनुष्य को कभी निद्रा नहीं लेनी चाहिए।

◆शैया पर कभी भी बैठेकर नींद नही लेनी चाहिए, क्योंकि इस तरह बैठकर सोने से रीढ़ की हड्डी पर असर पड़ता है।

◆सोने के बिस्तर पर भोजन को कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए क्योकिं अन्नदेवता नाराज होते है, मनुष्य शरीर से बीमार हो सकते है और बीमारी घर कर जाती हैं।

◆मनुष्य को विद्या देवी की पढ़ाई करते समय बिस्तर पर सोते सोते नहीं पढ़ना चाहिए क्योंकि इससे यादास्त शक्ति पर प्रभाव पड़ कर यादास्त शक्ति कम होती है।

◆मनुष्य को सूर्य अस्त के पूर्व नहीं शयन करना चाहिए क्योंकि इस समय दिया-बाती का समय होता है, इसलिए ईश्वर की पूजा के समय पर मनुष्य को नहीं सोना चाहिए।

◆मनुष्य को पूजा-पाठ करने के बाद मस्तिष्क के ललाट पर लगाये गए तिलक को लगाए हुए कभी नहीं सोना चाहिए। क्योंकि ईश्वर की पूजा में लगाये गए तिलक को लगाए हुए सोने से ईश्वर का अपमान समझा जाता है और ईश्वर की अनुकृपा भी कम हो जाती है।

◆मनुष्य को दरवाजे के सामने नहीं सोना चाहिए क्योंकि इस तरह सोने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है और शरीर में भारी पन व दुखावा होना शुरू हो जाता है, इसलिए मनुष्य को दरवाजे के सामने नहीं सोना चाहिए।

◆मनुष्य को हृदय पर अपना हाथ रखकर नहीं सोना चाहिए क्योकिं इस तरह सोने से हृदय का रक्त परिसंचरण में रुकावट होती है और शरीर में परेशानी शुरू हो जाती हैं।

◆मनुष्य को ब्रह्म स्थान की जगह पर, छत के पात या बीम के नीचे भी नहीं सोना चाहिए।

◆मनुष्य को पैर के ऊपर दूसरा पैर रखकर भी नहीं सोना चाहिए, इस तरह एक पैर के ऊपर दूसरा पैर रखकर सोने से शरीर के भाग में परेशानी और निद्रा सही तरह नहीं आती है।

◆मनुष्य को सोने के पलँग की चारों पायों को समान ऊंचाई होनी चाहिए शयन बेड ऊँचा भी नहीं होना चाहिए। इस तरह शयन बेड के पायों का ऊँचा होने पर शरीर में रक्त संचरण में बाधा पहुंचती है, केवल बीमारी के हालात में शयन बेड के पायों को ऊँचा रख सकते हैं।








 

Saturday, 5 June 2021

June 05, 2021

भोजन करने की सही दिशा को वास्तु शास्त्र से जानें (know the right direction of eating from vastu shastra)



भोजन करने की सही दिशा को वास्तु शास्त्र से जानें (know the right direction of eating from vastu shastra):-

दिशाओं का मनुष्य को अपने भोजन करते विशेष ध्यान रखना चाहिए, जो मनुष्य दिशाओं के अनुरूप भोजन करते हैं। उनका जीवन खुशहाली से भरा रहता है और जो मनुष्य बिना दिशाओं का ख्याल रखे ही भोजन करते है उनको अपने जीवन में बहुत ही कष्टों का सामना करना पड़ता है, दिशाओं का भी आधार होता है जो कि ग्रहों का प्रतिनिधित्व करती है गलत दिशा में भोजन करने से उस दिशा के सम्बन्धित ग्रह को बल मिलता है और वह ग्रह अपने जीवन में परेशानी पैदा करता है। इसलिए दिशाओं के अनुरूप जो नियम वास्तु शास्त्र और अपने धर्म ग्रन्थों में बताए गए है उनका पालन करते हुए ही भोजन करना चाहिए। दिशाओं का मनुष्य के जीवन में बहुत ही ज्यादा महत्व है, सही चलने वाले जहाज, वाहन अपनी मंजिल तक पहुंचते है, जबकि गलत दिशा में चलने वाले जहाज व वाहन समय का बिना मतलब बेकार करने के साथ ही अपनी मंजिल को भी गुमा बैठते है तथा बिना जरूरत के कष्ट एवं कठिनाइयों को भी झेलते है। लेकिन यह बात जुदा तरह की है,की होशियार मनुष्य परिस्थितियों को जानकर दिशाओं का बदलाव करके अपना अभीष्ट को प्राप्त कर लेते है और जीवन भर खुशहाली से रहते है।

मनुष्य जीवन में अनेक तरह के कष्ट और कठिनाइयां केवल दिशाओं के गलत उपयोग के कारण ही आती हैं। मात्र दिशाओं में थोड़ा बदलाव करके जीवन में सुख-शांति,विकास, इच्छा पूर्ति आदि को पाया जा सकता है।

भोजन के विषय में शास्त्रों की बातें:-शास्त्रों में भोजन के विषय में साफतौर पर निर्देश बताया है कि किस कामना वाला मनुष्य किस दिशा की ओर मुख करके भोजन करें?

भोजन करते समय मुख को पूर्व दिशा की ओर रखने का नतीजा:-शास्त्र के मतानुसार जिन मनुष्य को अपनी उम्र की बढ़ोतरी करनी है और जिनको अपने शरीर में कोई भी तरह की बीमारी को नहीं रखना चाहते है,उन मनुष्य को सदैव पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन को करना चाहिए।

यदि रोगी मनुष्य को पूर्व दिशा की ओर मुख कराकर पथ्य भोजन दिया जाये तो उनके रोग में जल्दी सुधार होता है और जल्दी ही रोग से मुक्त होते है।


भोजन करते समय मुख को दक्षिण दिशा की ओर रखने का नतीजा:-शास्त्रानुसार जिनको यश प्राप्ति की चाह रखने वाले मनुष्यों को दक्षिण दिशा की ओर मुख रखकर भोजन को करना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर मुख करने से मनुष्य को मान-सम्मान की असाधारण बढ़ोतरी होती है।

◆लेकिन जिन मनुष्यों के माता-पिता जीवित होते है,उन मनुष्यों को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके आहार को नहीं लेना चाहिए।

◆जीवित माता-पिता वाले मनुष्यों को पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके ही भोजन को करना चाहिए जिससे उनके स्वास्थ्य में बढ़ोतरी हुवे।


भोजन करते समय मुख को नैऋत्य कोण की दिशा की ओर रखने का नतीजा:-नैऋत्य कोण की दिशा की ओर मुख को रखकर भोजन करने वाले मनुष्य की पाचन शक्ति कमजोर होती है तथा पेट की अनेक बीमारियां हो सकती है।


भोजन करते समय मुख को आग्नेय कोण की दिशा की ओर रखने का नतीजा:-जो मनुष्य अपने मुख को आग्नेय कोण की दिशा में रखकर भोजन करते है उनको सेक्सगत अनेक तरह की गुप्त बीमारियां हो सकती है तथा स्वप्नदोष,प्रमेह,ल्यूकोरिया, प्रदररोग आदि में बढ़ोतरी हो सकती है।


भोजन करते समय मुख को वायव्य कोण की दिशा की ओर रखने का नतीजा:-जो वायव्य कोण की दिशा की ओर बैठकर करके भोजन करते है उनको वायु विकार दोष उत्पन्न हो सकते है।


भोजन करते समय मुख को पश्चिम दिशा की ओर रखने का नतीजा:-जिन मनुष्य की आर्थिक हालात कमजोर हो और अधिक धन की प्राप्ति की चाह हो तो पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन को ग्रहण करना चाहिए।

पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से मनुष्य की आर्थिक हालात ठीक हो जाते है और लेकिन आर्थिक हालात की बढ़ोतरी धीरे-धीरे ही होती है।

भोजन करते समय मुख को उत्तर दिशा की ओर रखने का नतीजा:-जो मनुष्य अपना मुख उत्तर दिशा की ओर रखकर भोजन को ग्रहण करते है उनको रुपयों-पैसों का नुकसान भुगतना पड़ता है।

ऋषियों ने साफतौर पर बताया है कि जो मनुष्य उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन के रूप में अपने लिए ऋण को बढ़ाने का भोजन ग्रहण करता है। जिससे वह मनुष्य दिन-प्रतिदिन ऋणी होता चला जाता है।


भोजन करने के नियम:-हमारे  ऋषियों-मुनियों ने जो नियम पुराने जमाने मे बनाये थे वे सभी नियम जीवन में भोजन करते समय अपनाने पर मनुष्य का स्वास्थ्य अच्छा और जीवन में धन-संपत्ति से युक्त होकर मनुष्य अपना जीवन सुख-शांति जीता है।

◆मनुष्य को भोजन करने से पूर्व हाथ-पैरों को धोककर ही करना चाहिए।

◆भोजन करते समय हमेशा पालथी मारकर आसन पर बैठकर ही करना चाहिए।

◆मनुष्य को कुर्सी पर बैठकर टांग हिलाते हुए भोजन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।

◆मनुष्य को भोजन करते समय बातचीत भी नहीं करनी चाहिए।

◆मनुष्य को भोजन करते समय एकाग्रचित होकर ही करना चाहिए।

◆मनुष्य को भोजन का प्रत्येक ग्रास को अपने दांतो से चबा-चबाकर ही ग्रहण करना चाहिए।

◆मनुष्य को अपने इष्ट देव को याद करते हुए भोजन को ग्रहण करना चाहिए।

◆मनुष्य को भोजन की थाली में से चार ग्रास अलग-अलग निकाल लेना चाहिए।

◆मनुष्य को भोजन इतना ही करना चाहिए जितना वह पचा सके।

◆मनुष्य को अपने पेट में दो भाग ही भोजन को ग्रहण करना चाहिए,तीसरा भाग जल के लिए और चौथा भाग हवा के लिए खाली रखना जरूरी होता है।

Thursday, 6 May 2021

May 06, 2021

मनुष्यों के व्यक्तित्व को जाने जूता, चप्पल और बूट शॉक्स के आधार पर (Know the personality of human beings on the basis of slipper, sandal and boot shox)

             



मनुष्यों के व्यक्तित्व को जाने जूता, चप्पल और बूट शॉक्स के आधार पर (Know the personality of human beings on the basis of slipper, sandal and boot shox):-

जूता, चमड़े के चप्पल और बूट शोक्स पहनने पर ज्योतिष के आधार पर मनुष्य में गुण व दोष की जानकारी(knowledge of the merits and demerits of humans on the basis of astrology on wearing slipper, leather  sandals and boot shox):-पुराने जमाने से ही मनुष्य ने अपने पैरों की रक्षा के लिए कई तरह के उपाय से करते थे।मनुष्य पैरों में पहनने के लिए लकड़ी के जूता(खड़ाऊ) का उपयोग करते थे। आजकल के जमाने में पैरों में पहनने के लिए तरह-तरह के जूते,सैंडिल,बिना डोरी के बूट और डोरी वाली बूट का उपयोग करते है। दिनोदिन नये-नये तरह के जूतों का निर्माण हो रहा है,जिससे मनुष्य अपने पैरों में पहनते है।इस तरह मनुष्य के द्वारा पैरों में पहने जाने जूतों, सैंडिल और बूट के आधार पर मनुष्य के बारे में ज्योतिष के आधार पर जान सकते है कि मनुष्य का मिजाज कैसा है, कैसा होगा,उसमें किस तरह गुण है और दोष है।इस तरह से जानने पर मनुष्य दूसरे मनुष्य के गुणों व अवगुणों से सचेत हो सकता है।

1.जूता :-स्लीपर या चट्टी का मतलब एक तरह की खुली जूती होता है। जो मनुष्य पी.वी.सी. चम्पल पहनते है,वे मनुष्य ज्यादा गुस्सा करने वाले, हमेशा शारीरिक श्रम करते रहने वाले जिससे उनको रुपये-पैसे से हमेशा तंगी रहती है। किसी भी काम को करने में कामचोरी करते हुए कल पर छोड़ने वाले व थोड़ा मिलने पर भी खुश होने वाले,जो कंगाल व गरीबी की स्थिति में जीवन को जीने वाले होते है। अधिकतर मनुष्य किसी भी तरह की नौकरी,ऑटो चलाने वाले व चपरासी के समान मनुष्य में गुण को अपनाते है।

2.चमड़े के सैंडल(चप्पल):-चमड़े के सैंडल का मतलब होता है कि एक तरह की चमड़े से बने हुए चप्पल होते है जिन परजिसमें एड़ी व पैर आदि को बांधने के लिए पट्टे होते है उसे चमड़े के सैंडल कहते है।

जो मनुष्य चमड़े के सैंडल को ज्यादा पहनते है,उनको शारीरिक श्रम ज्यादा करनी पड़ती है।

जो मनुष्य चमड़े के सैंडल को ज्यादा पहनते है,वे मनुष्य अपने ऊपर ज्यादा विश्वास करने वाले होते है।

जो मनुष्य चमड़े के सैंडल को ज्यादा पहनते है,वे मनुष्य किसी भी कम को जो वे नहीं कर सकते है उस काम पर ज्यादा आश्रित हो जाने वाले होते है।

जो मनुष्य चमड़े के सैंडल को ज्यादा पहनते है,वे मनुष्य अधिक मान-सम्मान वाले होते हुए भी वे दूसरों पर जल्दी विश्वास करने वाले होने से उनको विश्वास को धोखा मिलता है।

जो मनुष्य चमड़े के सैंडल को ज्यादा पहनते है,वे मनुष्य कोई भी काम में इतने मगन हो जाते है कि उनको अपने शरीर का भी ख्याल नहीं होता है।

जो मनुष्य चमड़े के सैंडल को ज्यादा पहनते है,उन मनुष्य को परिवार में मान-सम्मान नहीं मिलता है,लेकिन उनको दूसरी जगहों पर मान-सम्मान पाने वाले होते है।

जो मनुष्य चमड़े के सैंडल को ज्यादा पहनते है,यह मनुष्य अपने जीवन काल में कभी भी मायूस नहीं होने वाले होते है।

जो मनुष्य चमड़े के सैंडल को ज्यादा पहनते है,उन मनुष्य को भलाई के कामों में यश नहीं मिल पाता है।

जो मनुष्य चमड़े के सैंडल को ज्यादा पहनते है,उन मनुष्य के जीवनकाल में मुश्किलें आती रहती है और खुशी भी पाने वाले होते है और धर्म के मामलों में ज्यादा रुचि रखने वाले होते है।

3.बिना डोरी (शोक्स) का जूता(बूट):-पैर पर पहने जाने वाला एक विशिष्ट आकार का जूता जो पूरे पैर को ढँकता है उसे किसी भी डोरी से बांधने की जरुरत नहीं होती है,उसे बिना शोक्स(डोरी) वाला बूट या जूता कहते है।

जो मनुष्य बिना डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य धर्म-कर्म के कामों में अधिक रुचि रखने वाले और धर्म-कर्म से सम्बंधित ज्यादा ज्ञान देने वाले होते है।

जो मनुष्य बिना डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य दूसरे मनुष्य की आलोचना ज्यादा करने वाले होते है।

जो मनुष्य बिना डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य जल तत्व की प्रमुखता वाले होने से सब तरह से मक्खीचूस होते है।

जो मनुष्य बिना डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य जीवन भर मेहनत करते हुए रुपये-पैसो को कमाने के चक्कर मे लगे रहने वाले होते है।

जो मनुष्य बिना डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य सीधे-साधे साधु की तरह मिजाज के होते है और बोली से मीठे बोलने वाले होते है।

जो मनुष्य बिना डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है,इन मनुष्य को अपने परिवार-कुटुंब से अपमानित होना पड़ता है और सन्तान से दुःख मिलता है।

जो मनुष्य बिना डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य अपने बारे में ज्यादा विचारने वाले होते है व अपने इस तरह से दिखाते है कि वे किसी भी तरह से उनको कोई जानकारी नहीं है,लेकिन सब जानने वाले होते है।

जो मनुष्य बिना डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य ज्ञान-विज्ञान में ज्यादा लगाव रखने वाले होते है।

जो मनुष्य बिना डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य नैतिक आचरण व व्यवहार की शिक्षा देते है,लेकिन खुद नैतिक आचरण व व्यवहार की शिक्षा से दूर रहने वाले होते है।

4.डोरी वाले जूता(बूट शोक्स):-पैर पर पहने जाने वाला एक विशिष्ट आकार का जूता जो पूरे पैर को ढँकता है उसे किसी भी डोरी से बांधने की जरुरत होती है,उसे डोरी (शोक्स) वाला बूट या जूता कहते है।

जो मनुष्य डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य बोली में किसी को भी मात दे सकते है,वे लगातार बोली बोलने वाले व किसी दूसरे मनुष्य को अपनी बात को कहने से पूर्व उसकी बात को अपनी बोली से काटने वाले होते है।

जो मनुष्य डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य ज्यादा पढ़ाई-लिखाई करके राजकीय सेवा में या दूसरी जगह पर नौकरी करने वाले होते है।

 जो मनुष्य डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य कोई भी छोटे से छोटे काम को करते समय अभिमान करने वाले होते है।

जो मनुष्य डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य अधिक ऊंची पढ़ाई करके बड़े पद को प्राप्त करने वाले होते है।

जो मनुष्य डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य कोई भी काम को करते समय यह जताते है कि अमुक काम मैने किया व उस काम को करने का अभिमान करने वाले होते है।

जो मनुष्य डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य अपने बारे में पहले सोचने वाले होते है व अपना काम पहले निकालने वाले होते है और उनको दूसरों से कोई भी मतलब नहीं होता है।

जो मनुष्य डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य दूसरों बात को इधर-उधर करने वाले होते है।

जो मनुष्य डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है उन मनुष्य को सामाजिक जीवन में अपने नाम को शोहरत दिलाने व रुपये-पैसे को कमाने के अलावा कुछ नहीं दिखता है।

जो मनुष्य डोरी वाले जूता को अधिक पहनते है वे मनुष्य अपनी सन्तान से जीवनभर कष्ट सहन करने वाले होते है।

जूता, चमड़े के चप्पल,बिना डोरी के बुट और डोरी वाले बूट का महत्व:-मनुष्य जीवन काल में अपने पैरों को सुंदर दिखाने के लिए तरह की वस्तुओं को अपने पैरों में पहनता है, उनमें से जूता, चमड़े के चप्पल,बिना डोरी के बूट और डोरी वाले बूट पहनते है।इस तरह मनुष्य के द्वारा पैरों में पहने जाने वस्तुओं के आधार पर उसके बारे में जानकारी मिल सकती है,की मनुष्य का मिजाज कैसा होगा,जिससे उसके व्यवहार को जानकर मनुष्य सचेत हो जाते है।