राशियों की प्रकृति या धातु :- को चार भागों में बाँटा गया हैं। जो निम्नलिखित हैं
राशियों की प्रकृति या धातु
| प्रकृति | पित | वात | सम या मिश्रित। | कफ |
|---|---|---|---|---|
| राशियाँ | मेष, सिंह, धनु | वृषभ, कन्या, मकर | मिथुन, तुुला, कुम्भ | कर्क, वृृृश्चिक, मीन |
राशियों की प्रकृति या धातु का फल एवं उपयोग :- स्वयं की प्रकृति या धातु के अनुसार राशियां फल प्रधान करती हैं
* इनका उपयोग चिकित्सा ज्योतिष में होता हैं लग्न या षष्ठ भाव में स्थित राशि की प्रकृति से संबंधित रोग होने की आशंका रहती हैं।
*इसी प्रकार दशानाथ जिस राशि में स्थित है, उस राशि की प्रकृति से संबंधित रोग देता हैं।
राशियों का प्लवत्व--प्लव का अर्थ है ढलान या बहाव दिशा।राशियों का प्लवत्व उनके स्वामियों पर निर्भर करता है। विभिन्न राशियों के प्लवत्व निम्नलिखित हैं
*राशि के स्वामी की जो दिशा होती हैं, वही दिशा राशि का प्लव है।
*जिस लग्न में यात्रा करनी हो उस राशि के स्वामी की दिशा में यात्रा करने से राजा शत्रु को शीघ्र पराजित करता हैं।
राशियों का प्लवत्व सारणी
| राशियाँ | प्लव |
|---|---|
| मेष | दक्षिण |
| वृषभ | आग्नेय |
| मिथुन | उत्तर |
| कर्क | वायव्य |
| सिंह | पूर्व |
| कन्या | उत्तर |
| तुला | आग्नेय |
| वृश्चिक | दक्षिण |
| धनु | ईशान |
| मकर | पश्चिम |
| कुम्भ | पश्चिम |
| मीन | ईशान |
राशियों के प्लवत्व का उपयोग :- राशि के स्वामी की जो दिशा होती हैं, वही दिशा राशि का प्लव है।
* जिस लग्न में यात्रा करनी हो उस राशि के स्वामी की दिशा में यात्रा करने से राजा शत्रु को शीघ्र पराजित करता हैं।
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